विकलांगता शब्द ही विकलांग लगता है अशफाक के आगे

विकलांगता शब्द ही विकलांग लगता है अशफाक के आगे

‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर के पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है, वाकई में किसी ने सच ही कहा है कि दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो पूरी कायनात आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाने में जुट जाती है…ठीक ऐसे ही अपने बुलंद हौंसले से अपनी सभी मुश्किलों को बौना साबित किया है मुरादाबाद के अशफाक ने। कहने को अशफाक के दोनों हाथ नहीं है लेकिन अपनी मेहनत और लगन के बल पर अशफाक हर वो काम कर लेता है जो कि दो हाथ वाले भी नहीं कर सकते। अपनी लगन से आज अशफाक अपने कटे हाथों से ही लिखने के साथ ही कुशलता से लैपटॉप चला लेता है। कार चलाना बाईक चलाना और अपनी दुकान में कारों के पंचर जोड़ना अब अशफाक के बांए हाथ का खेल है। अशफाक को देखकर कोई ये नहीं कह सकता कि वो दोनों हाथों से विकलांग है। एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ गंवाने के बाद अशफाक को लगता था कि उसकी जिदंगी अब बोझ बन चुकी है। इसी बीच अशफाक ने एक दिन न्यूज चैनल में अपने जैसे एक विकलांग लड़के को काम करते देखा। जिसके बाद उसके भीतर भी आगे बढ़ने का जज्बा जागा और आज मुरादाबाद के बस्तरपुर में रहने वाला बीएससी का छात्र अशफाक आज विकलांगों के लिए एक मिसाल बन चुका है।

 

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